
ज्ञानेश कुमार पर बढ़ा दबाव? चुनाव आयोग के अंदर 14 आपत्तियों से घमासान

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विवाद बढ़ गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR और आयोग के कुछ फैसलों को लेकर कम से कम 14 औपचारिक आपत्तियां दर्ज की हैं।
विवाद के केंद्र में SIR यानी Special Intensive Revision है, जिसके तहत मतदाता सूचियों की समीक्षा की जा रही है। विपक्ष ने प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कौन हैं इस पूरे विवाद के 5 प्रमुख किरदार?
1. ज्ञानेश कुमार
ज्ञानेश कुमार मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। SIR और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर उन पर विपक्षी नेताओं ने कई आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 24 सितंबर को उनके इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें कथित चुनावी गड़बड़ियों की जांच में गवाह बनने की सलाह दी।
2. सुखबीर सिंह संधू
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू उन दो आयुक्तों में शामिल हैं, जिनके बारे में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी आपत्तियां पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार दर्ज की गईं।
3. विवेक जोशी
दूसरे चुनाव आयुक्त विवेक जोशी का नाम भी इसी रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने भी SIR से जुड़े कुछ कदमों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इन दावों ने तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
4. राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस विवाद को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और कहा कि SIR से जुड़े मामले में उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। ये राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्षों के अलग-अलग रुख हैं।
5. विपक्षी दल
कई विपक्षी नेताओं और दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा SIR को लेकर सवाल उठाए हैं। 24 सितंबर को कांग्रेस सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि विपक्ष संसद के दोनों सदनों में CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।

वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर विचार-विमर्श संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और पिछले 10 महीनों में लिए गए फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूचियों की समीक्षा की जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में जून 2025 से शुरू हुई प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। इस आंकड़े और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा है।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया और निर्णय लेने की व्यवस्था का बचाव किया है। इसलिए इन आरोपों और उनके राजनीतिक निष्कर्षों को अंतिम तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा

SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूचियों की समीक्षा की जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में जून 2025 से शुरू हुई प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। इस आंकड़े और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा है।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया और निर्णय लेने की व्यवस्था का बचाव किया है।
क्या ज्ञानेश कुमार देंगे इस्तीफा?
फिलहाल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की कोई पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। 24 सितंबर को विपक्ष की ओर से संसद में उन्हें हटाने के प्रस्ताव की तैयारी की खबर सामने आई है। इसी बीच CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी 48 घंटे में इस्तीफा देने की मांग की है और ऐसा नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
अब आगे की स्थिति संसद में प्रस्ताव, चुनाव आयोग के रुख और SIR से जुड़े विवाद पर होने वाली कानूनी एवं राजनीतिक कार्रवाई से तय होगी। फिलहाल इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
