
पटना: बिहार के जमुई की नाबालिग पीड़िता से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक X हैंडल से पीड़िता और उसके परिवार के साथ मुलाकात की तस्वीर साझा की गई थी। विवाद के बाद यह पोस्ट हटा दी गई।
मामले में अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में तैनात स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ पटना के सचिवालय थाने में FIR दर्ज की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, आरोप है कि मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर पोस्ट की गई थी।

तस्वीर को लेकर क्यों हुआ विवाद?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमुई मामले की पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी। इसके बाद मुलाकात की तस्वीर उनके X हैंडल से पोस्ट की गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक तस्वीर में चेहरा धुंधला था, लेकिन विपक्ष ने आरोप लगाया कि पोस्ट से पीड़िता की पहचान सामने आने का खतरा पैदा हुआ। विवाद बढ़ने के बाद तस्वीर हटा दी गई।

POCSO कानून को लेकर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और RJD सांसद मीसा भारती ने इस पोस्ट को लेकर सवाल उठाए और कार्रवाई की मांग की। तेजस्वी यादव ने POCSO Act की धारा 23 का हवाला देते हुए कहा कि नाबालिग पीड़ित की पहचान सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। यह उनका आरोप और कानूनी व्याख्या है; FIR में किस-किस प्रावधान को अंतिम रूप से लागू किया गया है, यह पुलिस जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से तय होगा।
जमुई मामले में पुलिस पहले भी पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।
CMO कर्मचारी के खिलाफ दर्ज FIR के बाद मामले की पुलिस जांच शुरू हो गई है। जांच में यह देखा जाएगा कि तस्वीर किसके माध्यम से और किन परिस्थितियों में मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट हुई तथा क्या उससे नाबालिग की पहचान कानून के तहत उजागर हुई थी।
